Purvi Aggarwal
Purvi Aggarwal 12 Jun 2020
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21 Mar 2018
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ईर्ष्या |

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⁣हम कई बार अपने मन में ईर्ष्या, नफ़रत, क्रोध आदि को जन्म दे देते हैं और फिर बाद में पछताते हैं। आख़िर ये भाव पैदा कहाँ से होते हैं? क्या इनसे छुटकारा मिल सकता है? जानते हैं इससे बचने के तरीके के बारे में।

जब तक आप भीतर से अधूरापन महसूस करते रहेंगे, तब तक किसी इंसान के पास आपके अनुसार अपने से थोड़ा सा भी ज्यादा दिखने पर जलन महसूस होगी। जब आप बहुत ख़ुश होते हैं, तब क्या आपके भीतर कोई जलन होती है? नहीं। जब आप नाख़ुश होते हैं, तभी आपके भीतर ईर्ष्या जन्म लेती है। आप ईर्ष्या की चिंता मत कीजिए। अगर जीवन के हर पल में, आपके भीतर की ऊर्जा परम आनंद से भरी है, तो जलन कैसे टिक सकती है? जलन से लड़ने से बेहतर होगा कि अपने जीवन के अनुभव को संपूर्ण बना लीजिए।

ईर्ष्या आपका स्वभाव नहीं है |यह आपके स्वभाव का अंग नहीं है।


Credit/Source:- ⁣https://www.youtube.com/watch?v=ApKwXnp3mhs

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